परमाणु की संरचना

अध्याय 4 परमाणु की संरचना (Structure of the atom)

परमाणु की संरचना
डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु अविभाज्य और अविनाशी था लेकिन परमाणु के भीतर 2 मूल कणों , इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की खोज ने डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की इस धारणा को गलत साबित कर दिया अब यह जानना आवश्यक था कि इलेक्ट्रान और प्रोटॉन परमाणु के भीतर किस तरह व्यवस्थित हैं इसको समझने के लिए बहुत से वैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न प्रकार के मॉडल प्रस्तुत कीजिए

टॉमसन का परमाणु मॉडल

टॉमसन ने परमाणु की संरचना से संबंधित एक मॉडल प्रस्तुत किया जो क्रिसमस केक की तरह था इसके अनुसार परमाणु एक धन आवेशित गोला था जिसमें इलेक्ट्रॉन क्रिसमस केक में लगी सूखे मेवे की तरह थे तरबूज का उदाहरण भी हम ले सकते हैं जिसके अनुसार परमाणु में धनआवेश तरबूज के खाने वाले लाल भाग की तरह दिख रहा है जबकि इलेक्ट्रॉन धन आवेशित गोले में तरबूज के बीज की भांति धँसे देते हैं

Card image cap

टॉमसन के अनुसार
(1)  परमाणु धन आवेशित गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें धँसे होते हैं
(2)  ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं इसलिए परमाणु वैधुतीय रूप से उदासीन होते हैं

टॉमसन के मॉडल से परमाणु के उदासीन होने की व्याख्या तो हो गई किंतु दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों के परिणाम को इस मॉडल के द्वारा नहीं समझाया जा सका

रदरफोर्ड का मॉडल

अरनेस्ट रदरफोर्ड ने एक प्रयोग किया जिसमें उन्होंने तेज गति से चल रहे अल्फा कणों को एक सोने की पन्नी(पननी) पर टकराया उन्होंने सोने की पन्नी(पननी) इसलिए चुना क्योंकि वह बहुत पतली परत चाहते थे सोने की पन्नी (पननी) 1000 परमाणुओं के बराबर मोटी होती है अल्फा कण द्विआवेशित हिलीपन कण होते हैं यह धन आवेशित होते हैं क्योंकि इनका द्रव्यमान 4 u होता है इसलिए यह तीव्र गति से चल सकते हैं और अल्फा कणों में पर्याप्त ऊर्जा होती है
रदरफोर्ड का यह अनुमान था कि अल्फा कण सोने के परमाणुओं में विद्यमान अवपरमाणुक कणों के द्वारा विक्षेपित होंगे क्योंकि अल्फा कण प्रोटॉन से बहुत अधिक भारी होते हैं इसीलिए उन्होंने अधिक विक्षेपण की उम्मीद नहीं की थी लेकिन अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग उम्मीद के बिल्कुल विपरीत परिणाम दिया
1 तेज गति से चल रहे हैं अधिकतर अल्फा कण सोने की पन्नी (पननी) से सीधे निकल गए
2  कुछ अल्फा कण बहुत छोटे कोण से विक्षेपित हुए
3 आश्चर्यजनक यह रहा कि प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस आ गया

रदरफोर्ड परमाणु मॉडल के परिणाम

1 परमाणु के भीतर का अधिकतर भाग खाली है क्योंकि अधिकतर अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए सोने की पन्नी (पननी) से बाहर निकल जाते हैं
2 बहुत कम कण अपने मार्ग से विचलित होते हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि परमाणु में धन आवेशित भाग बहुत कम है
3 बहुत कम अल्फा कण 180 डिग्री पर विक्षेपित हुए थे जिससे यह संकेत मिलता है कि सोने के परमाणु का पूर्ण धन आवेशित भाग और द्रव्यमान परमाणु के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित है

प्राप्त आंकड़ों के आधार पर रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष की निकाला नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या से 10 की पावर 5 गुना छोटी होती है
रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग के आधार पर परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया

जिसके निम्नलिखित गुण थे

1  परमाणु का केंद्र धन आवेशित होता है जिसे नाभिक कहा जाता है एक परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान नाभिक में होता है
2 इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर वर्तुलाकर (वृत्त के आकार का) मार्ग में चक्कर लगाते हैं
3 नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में काफी कम होता है

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियां

वर्तुलाकर (वृत्त के आकार का) मार्ग में चक्कर लगाते हुए इलेक्ट्रॉन का स्थाई रह पाना संभव नहीं था कोई भी आवेशित कण गोलाकार कक्ष में त्वरित होगा तब त्वरण के कारण आवेशित कणों से उर्जा का विकिरण होगा इसी कारण स्थाई कक्ष में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी उर्जा विकिरित करेगा और नाभिक से टकरा जाएगा अगर ऐसा होता तो परमाणु अस्थिर होता जबकि हम जानते हैं कि परमाणु स्थाई होते हैं

बोर का परमाण्विक मॉडल

नील्स बोर ने रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल पर उठी आपत्तियों को दूर करने के लिए परमाणु की संरचना के बारे में निम्नलिखित अवधारणाएं प्रस्तुत की
1  इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगाता है जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं
2 जब इलेक्ट्रॉन विविक्त कक्षा में चक्कर लगाते हैं तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है

संयोजकता क्या है

किसी परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता कहा जाता है
बोर बारी के नियम के अनुसार किसी परमाणु के बाह्तम कक्षा में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रख सकता है
जिन तत्वों के परमाणु के बाह्तम कक्ष में आठ इलेक्ट्रॉन होते हैं वे रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं

परमाणु संख्या क्या है

किसी परमाणु में उपस्थित प्रोटानों की संख्या उसकी परमाणु संख्या कहलाती है इसे Z से प्रदर्शित किया जाता है किसी तत्व के सभी अणुओं की परमाणु संख्या Z समान होती है

द्रव्यमान संख्या क्या है

परमाणु की द्रव्यमान संख्या उसमें उपस्थित प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के योग के बराबर होती है यह परमाणु के नाभिक में उपस्थित होती है परमाणु का संपूर्ण द्रव्यमान उसके नाभिक में उपस्थित होता है

समस्थानिक क्या है

जब कुछ तत्वों के परमाणुओं की परमाणु संख्या समान हो लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग-अलग हो तो ऐसे तत्वों को समस्थानिक कहते हैं जैसे कि हाइड्रोजन , क्लोरीन , कार्बन

समस्थानिक के उपयोग

  • यूरेनियम की एक समस्थानिक का उपयोग परमाणु भट्टी में ईंधन के रूप में किया जाता है
  • कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग किया जाता है
  • घेंघा रोग के इलाज में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग किया जाता है

समभारिक क्या है

वे तत्व जिनकी परमाणु संख्या अलग-अलग होती है और द्रव्यमान संख्या समान होती है समभारिक कहलाते हैं जैसे कि कैल्शियम , आर्गन